-मानबहादुर चौधरी ‘पन्ना’ परिचयः सख्या नाच थारु समुदायम किल नाच्जिना मौलिक नाच हो । यी नाच समयके हिसाबसे सबसे लम्मा समयसम नच्ना नाच हो । सख्या नाच...
सुर्खेत: गैलक भडौ २९ गते लखागनि थारु उत्थान मञ्च सुर्खेत ओ राष्ट्रिय थारु कलाकार मञ्च शाखा सुर्खेतके संयुक्त आयोजनाम थारु भाषा, कला, साहित्यके उत्थान, विकास, संरक्षण एवम् प्रवर्धन कर्ना...
उज्जर गोन्या कर्या चोल्या कानम जिउरा लगैना ढिक्रहोक रातभर पैँया नाच्ख गाउँ जगैना गाउँक युवा युुवतिन् नचैठ बलाबला कत्रा सुग्घर हमार संस्कृति ओ कला । आपन डेबि डिउटन् पुज्ना...
धन सम्पत्ति रलसे आफन्तसे टरकठ मनै बेडाग ऐनासक बन खोज्क चरकठ मनै काल्ह के डेख्ल बा हाठ थाप निपरी कैक पैसाले मतलबी बन्ख बोलीम झरकठ मनै जम्म कुहल विचारके...
हरेक जातजातिके सभ्यताके विकास सँगसँग भाषा, कला, संस्कृति, मूल्यमान्यताके विकास हुइटि गैल ओ कालान्तरम मैगर संस्कृति बन पुगल । थारु जाति कला संस्कृतिम बहुट धनी ओ सम्पन्न...
‘अइ ! उ लवन्डा हेरो कैसे–कैसे करटा ?’ ‘अइ ! के हो ?’ ‘के रहि, सझ्लान बर्किक छुट्कि डुलरुवा छावा हुइन्, उहे हरबरिया, के रहि ।’ ‘यि, डबवा...
सुर्खेत: थारु भाषा साहित्यकार मानबहादुर चौधरी ‘पन्ना’ क्षेत्रीय प्रतिभा पुरस्कार २०८० से पुरस्कृत हुइल बाट । साझा बिसौनी दैनिकके थारु भाषा विशेष परिशिष्टाङ्क ‘फूलुवार’ के सम्पादक ओ थारु मानक भाषा मस्यौदा...
थारु मनैनके भित्रर एकठो बाहार और मन रठिन् थारु मैननके आकासके टोरैया खसैना झन रठिन् कसिक फसैना मकरब जाल असक षडयन्त्र रच्ना बुझ निसेक्जिना हुकनक व्यवहार अनखन रठिन् कत्रा...
भिटामे क्यालेन्डर बरे आरामसे झुरल बा । केने अक्को ठकाइ नै लग्ठिस् काहुन उहि । जबकि बिन नै औरे बरस पुग्ले उ अक्को बिसाइ नै पाइठ । मै जुन रत्नपार्कसे कीर्तिपुर टक...
सामुदायिक र निजी दुनु तहके विद्यालयम थारु भाषा अनिवार्य लागु कर्ना बर्दियाके बारबर्दिया नगरपालिकामसे पहिल तयार कैगिल लिरौसी थारु भाषक स्थानीय पाठ्यक्रम बारबर्दिया गौरब (कक्षा १–३) के ३...
आज बद्री फे गुम्म बा । पानी पर्नासक करठ पानी फे पर निस्याकठो । जारक मार बुह्राइलबुह्राखारा पस्कक आँगीठे गिन्योर बैठल बाट । यी बरस महाजोरसे जार बह्रल बा ।...
शीर्षक हेर्टी कि बटचिफ्ला शव्दके अर्थ त अनुमान कै स्याकल हुइबी । यकर शाब्दिक अर्थ बट्वोइना सिपार, बहुत रसगर बात बट्वोइना कला विशेष, जसिक फेन आफन ओहर मोखलेना...