सेटिङ

हिजोअस्तिका दिनसम्म सुनसान देखिने गैरी भञ्ज्याङ गाउँमा फेरि चहलपहल बढेको थियो । गाउँका टाठाबाठाहरू चलमलाउन थालेका थिए, किन कि उनीहरूको कमाइ हुने दिन नजिकिदै थियो । देशभर चुनावको महामेलाको...

रिठेक राजनीति

काल्हिक दिनसम सुनसान डेख्जिना गौह्री गाउँम फेनसे चहलपलह बह्रल रह । गाउँके टाठोबाठो मनै चलमलाइ भिरल रलह । काखरकि असिन समयम मनैनके कमाइ हुइना दिन लघुच्च अइटि रलहिन् । देशभर चुनावके महामेलाके...

नेपाल एकठो बहुजातिक, बहुसांस्कृतिक, बहुधार्मिक एवम् बहुपहिचान रलक मुलुक हो । वि.सं. २०७८ सालके जनगणनाअनुसार नेपालम १४२ जातजाति बाट कलसे १२४ भाषाके संख्या बा । जनसंख्याके दृष्टिले थारु भाषा चौथौ...

  प्राय मै नेपालगञ्ज स्वास्थ्यके चेकजाँजके लाग जैना कर्ठु । डक्टरोक सल्लाहअन्सार समय समयम फ्लोअप कर्टि रठु । ढेर दिन पाछ मै नेपालगञ्ज आपन स्वास्थ्यके लाग चेकजाँचके लाग जैना समय...

अघटे ओ आजकाल

१.पैल्ह पैल्ह गाउँघर ओहर सुनु बुडी बुबनके बात डाइ बाबनके बात डाडु भैयनके बात अघटे स्कुल निरह, क्याम्पस निरह शिक्षा निपैलि दीक्षा निपैलि घरक काम बन्वा काठि कर गैलि...

परिचयः टरहिह्वारले मनैन चौकस ओ चम्पन बनाइठ । हरेक जाति समुदायके आपन मौलिक तौरतरिकासे मन्ना विभिन्न चाडपर्व रठिन् । नेपालम थारु समुदाय फे एक अलग पहिचान डेना खालके आपन...

मानबहादुर चौधरी ‘पन्ना’   १. गोरी डराइ नेपाल एकठो बहुजातिक, बहुसांस्कृतिक, बहुधार्मिक एवम् बहुपहिचान रलक मुलुक हो । वि.स. २०७८ सालके जनगणनाअनुसार नेपालम १४२ जातजाति बा । भाषा आयोगके...

ज्ञानविर मामा

मानबहादुर चौधरी ‘पन्ना’   ‘हेरो भान्जा हमार देशम प्रजातजन्त्र, गणतन्त्र, लोकतन्त्र ज्या कलसे फे सामन्तिनके शासन बा । हमार लाग त जुन शासन अइलसे फे ओसह ओसह पलिबाटी । मै नेपालके...

मानबहादुर चौधरी ‘पन्ना’ गोरी डराइः डा.तारानाथ शर्मा घनघस्याको उकालो कना नियात्रा संस्मरणम कलबाट–‘जीवन एकठो निटुङ्ग्यैना यात्रा रलक ।’ यात्रा निरन्तर चल्ती रहठ । हर मनैनके मेरमेरके चाहना, रुचि, सोच विचार भिन्न...

  गोरि डराइः हरेक कार्यक्रमके आफन आफन किसिमके इतिहास रहठ । आफन किसिमके कथा रहठ । थारु साहित्य साहित्यके फेन आफन इतिहास बातिस् । यि कार्यक्रमके परिकल्पनाकार एवम् पार्दुभाव...

गुर्‍वान सन्ह्ली आज सपर्ख वीरेन्द्रनगरओहर लग्ली । सायद ठरोक पठैलक रुप्या अइलिन् कि का ? ठरोक बिडेश गिलक तीन बरस पुगटिन् । ट्यामट्यामम आइ.एम.ई.मसे पैसा झिक जाइ ब्याला आजकाल...

  बपकी सगर गैनु हाँ मुरिया लहान सखिए हो सेंडुरा छुटल पानी घाट । माघक डन्डुर महिनाम थारु जाति समुदायम आफन भेषभुषा, संस्कृतिम सजधज होखन आपन मौलिक गिटबासके झन्कारम चौकस...