अष्टिम्की

टिकी टिकी अष्टिम्की आऊ बाबु आऊ
झिकिरमिकर महतान बह्री टिकी करे आऊ ।
लौव लौव लुगा बाबु झट्टेहे घलाऊ ,
झकरमकर दिया बार्ख मिठ गीत सुनाऊ ।।
मन्ड्रया डाडु हमहन छुनुक छुनुक नचाऊ,
कान्हा भगुमान सिलिरसिलिर मुरली बजाऊ ।
छुटी छुटी बाबु हुक्रे अष्टिम्किक गीत गाऊ,
भुख लागता कि नाही नाठाग्के बताऊ ।।
भदओक महिना पानी परे झाऊ झाऊ,
आष्टिम्की टिके बाबु दुरदुरसे आऊ ।
डाडुभइएन खुवैना अग्रासन पुगाऊ,
ब्रत बैठख दिदी भैयक मैगर सम्बन्ध बनाऊ ।।

मानबहादुर चौधरी ‘पन्ना’ ।