आधुनिक साहित्यम थारु साहित्य

एक स्ठानके डोसर स्ठानसम सुचना सम्प्रेसन कैना अठवा पहुँच पुगैना बिड्ढुटिय माढ्यमहे सुचना परबिढि कहे सेक्जाइठ । जस्टे कि मोबाइल फोन, वायरलेस, इन्टरनेट, वेवसाइट, इमेल सुचना सम्प्रेसनके माढ्यम हो । विगट एक डुइ डसकमे सुचना परबिढिक विकास बहुट हालिसे आगे बर्हटि जाइटा । सुचना परबिढिक विकासले आज विसव एक गाउँ जइसिन बनल बा । सुचना परबिढि विस्व भरिक मनैनहे नेटवर्क मार्फट् सहजिलसे जोरना काम कैले बा । विस्वक एक कोन्वाँसे डोसर कोन्वक मनै अटना लग्गु हुइल अनुभव कैठाँ कि एक कोन्टिक मनै डोसर कोन्टिक मनैन्से बाट करेअस लागठ । आपन इष्ट मिट्र नाटागोटासे परट्यच्छ अनुहार हेर्टि बटवाइ सेक्ना अवस्ठा बा । आज परबिढिक विकासले विसवक समाचार, घटना एक क्लिकके भरमे हम्रे जाने पाइटि । यि मानेमे आजके पुस्टा बहुट भाग्यमानि बा ।
हम्रे जानके वा नैजानके फेन बडलटि रलक परबिढिहे आट्मसाठ कइटि बटि । आजसे डस बरस पहिले मोबाइल फोन सर्वसाढारणके लग महा डुरके बाट रहे । लेकिन आज सबके हाँठमे मोबाइल बा । मोबाइलसे बाट बट्वइना बाहेक आपन डैनिक जिन्गीमे काम लग्ना मेर मेरिक सुचना, जानकारि लेहे सेक्ठि । इन्टरनेट, इमेल, फेसबुक, कलेजके रिजल्ट, डैनिक समाचार, टेलिभिजन, बैंकके स्टेटमेण्ट, बिजलिक बिल टिर्ना काम, बजारमे सामान खरिड कैना काम यावट चिजके सुविढा आज हम्रे आपन हाँठमे रलक मोबाइलसे पाइसेक्ठि । यहाँसमकि आपन बिडेसमे बैठलक आफन्टसे मोबाइलमे बिना पैसक घन्टौं एक डोसर जनहनके मुहार हेर्टि बट्वइना सुविढा मोबाइल फोनमे आराखल । सुचना सञ्चार परबिढिक विकास आज हमार हरेक काम सहज ओ हालि–हालि बन्टि गइल बा । सुचना संचार परबिढिक माढ्यमसे आज आपन घरे बैठले बैठले डिग्रि हासिल करे सेक्ना अवस्ठा बा । घरहिँ बैठके अमेरिका लगायट विस्वके बरे बरे विस्वविड्यालयके पुस्टकालयमे रलक किटाब पर्हे सेक्ना सम्भव हुइल बा ।
सुचना परबिढि अटना हालि विकास हुइटा कि उहि आट्मसाठ कैके कौनो गुन्जाइस नै हो । सुचना परबिढिक विकास संगे संगे हम्रे फेन आपनहे बडल्टि जैना आवस्यकटा बा । यडि समय सापेच्छ चले नैसेकब कलेसे अपनेहे पाछे पर्ना निस्चिट बा । आजुक युवा जमाट बडल्टि रलक सुचना परबिढिमे बहुट सचेट विल्गठाँ । लावा–लावा परबिढिहे टुरुन्ट आट्मसाठ कैल विल्गठाँ । यि आजुक आवस्यकटा फेन हो । यि सुचना परबिढिहे आपन छेट्रामे आपन समुडायकलग भरपुर उपयोग करे सेक्लेसे समाजहे आगे बढाइक लग महट्वपुर्न भुमिका खेले सेकि ।
सुचना ओ संचार परबिढिमे आजकल सामाजिक सन्जालके फेन बेल्सना डिनेडिन बर्हटि जाइटा । आजकल बहुटसे बेल्सटि अइलक सामाजिक सन्जाल फेसबुक, ट्विटर, युट्युब आडिहे माने सेक्जाइठ । लेकिन विस्वमे सबसे ज्याडा चल्लक सामाजिक सन्जाल फेसबुक, युट्युव हो । आजके डिनसम विस्वमे फेसबुक चलुइया मनै ५ सौ करोड बटाँ ।
सामाजिक सन्जालमे थारू साहित्य
फेसबुक डेस्कटप, ल्यापटप, मोबाइलसे सजिलसे चलाइ सेक्ना सामाजिक सन्जाल हो । आजकल हरेक युवनके मोबाइलमे फेसबुकके पहुँच बा । फेसबुकके माढ्यमसे आपन गटिविढि, आपन भावना, आपन रचनाट्मक काम, अक्के घरिमे सम्प्रेसन करे मिलठ ।
फेसबुकमे विसेस कैके युवा वर्ग बहुट आकर्सिट विल्गठाँ । यम्हे थारू समुडायक युवा फेन पाछे नै परल हुइट । आजकल थारू युवा आपन पहिचानके लग जट्रे सचेट बटाँ, ओट्रे लावा परबिढिहे फेन आट्मसाठ कैटि जाइटटाँ । जागरुक थारू युवा सामाजिक सन्जालके माढ्यमसे आज थारू भासा, साहित्यहे मलजल कैटि बटाँ ।
थारू समुडायक लग थारूनके आर्ठिक, राजनिटिक, सामाजिक, सांस्कृटिक हरेक पच्छके परचार परसारके लग तजबचग अयmmगलष्तथ (थारू कम्युनिटि) फेसबुक पेज आघे आइठ । थारू कम्प्युनिटि थारून्के भासा, सांस्कृटिक पहिचानहे चिन्हैना ओ परवर्ढन कैना काममे आगे विल्गठ । यकर एडमिन आशिष चौधरीक अन्सार रोजना ५० हजार मनै हेर्लक रेकर्ड बिल्गठ ओ थारू कम्प्युनिटिक फेसबुक पेज २०७२ माघ २९ गटेसम २ लाख ८५ हजार मनै मन पराइल बटैलाँ । थारू कम्युनिटि थारू भासा साहिट्यहे पोष्ट कैके, सेयर कैके जोडटोडके साठ परवर्ढन करना काममे लागल बा ।
अस्टके थारूनके गटिविढिहे लच्छिट कैके बनैलक थारू समुडायमे चर्चिट वेवसाइट धधध.तजबचगधबल.अयm (थारूवान डट कम) फेन थारून्के भासा साहिट्यहे ओट्रे पराठमिकटा डेहल विल्गठ । यि वेवसाइट हेरुइयनके संख्या फेन कम नै हो । यकर एडमिन मदन चौधरीक अन्सार रोजना २२ हजार मनै लगअन कैके हेर्ठां । यि साइटमे थारू भासा साहिट्यहे विसेस पराठमिकटा डेके छुट्टे कोलमको बेवस्ठा कैगइल बा । जेम्ने थारू भासा साहित्यके लावा–लावा चाज नियमिट अपडेट कैल बिल्गठ । एडमिन मदनके अन्सार बिसयबस्टु अन्सार थारू भासा साहित्य पर्हुइयनके संख्या फेन उल्लेख्य बा ।
ओहोंर धधध.तजबचगलप.अयm (थारूनके डट कम) फे थारू भासा साहिट्यहे महट्व डेके छुट्टे कोलमके बेवस्ठा कैले बा । यि पोर्टलके एडमिन रामप्रसाद चौधरीक् अन्सार रोजना १० हजार टक पाठकलोग थारून्के डटकम लग अन कैके हेर्ठां । २०७२ अघन १ गटेसे थारू ओ नेपाली भासाके अनलाइन संस्करन धधध.जबmबचउबजगचब.अयm (हमार पहुरा डट कम) सन्चालनमे आइल बा । यि अनलाइन संस्करनमे फेन थारू भासा साहिट्यहे महट्व डेके स्ठान डेहल विल्गठ । छोट समयमे यि अनलाइन पत्रिका फे लोकपिर्य हुइटि रलक बाट यकर संचालक पत्रकार लक्की चौधरी बटैलाँ ।
उपर उल्लेख कैलक हरेक अनलाइन संस्करनमे थारू भासा, साहित्य, कविटा, गजल, कठा, गिट परस्टुट कैल विल्गठ । अस्टके व्यक्टिगट फेसबुक पेज मार्फट फेन ढेर थारू सरष्टालोग आपन सिर्जना पस्कल भेटा जाइठ । वेवसाइट या सामाजिक सन्जालहे सहिसे बेल्से सेक्लेसे यि परबिढि मार्फट् हमार भासा, संस्कृटिहे जोगैना ओ परचार परसार कैना विस्व सामु चिन्हैना काममे कोसे ढुंगा साविट हुइ कना बाटमे डुइ मट नै हो ।
आजकल थारू भासक पट्रपट्रिका परकासनमे बर्हटि गइल बा । थारू भासा साहित्यमे रुचि लेहुइया मनैन्के संख्या फेन बर्हटि गइल पा जाइठ । थारू साहिट्य हालसम पट्रपट्रिका, पुस्टकमे सिमोट्टि आइलमे यकर विकास करम छापामे किल डेखे ओ पर्हे मिले । लेकिन अजकलिक युवा पुस्टा सुचना परबिढिक् माढ्यमसे फेन थारू साहित्यहे बहुट रफ्टारमे आगे बर्हैटि बटाँ । यि थारून्के भासा, संस्कृटि, साहित्य, कला संरच्छन सम्वर्ढन कैना ओ परचार परसार कैना काममे एकठो लावा आयाम ठपल बा ।
मनैनके डैनिक जिवन अट्ना बेस्ट बन्टि जाइटा कि पट्रपट्रिका पर्हना फुर्सड फेन नै मिल्ठिन । मनै बहुट सौखिन हुरख्लाँ, मनै हरेक छेट्रामे छनौट विकल्प खोज्टिरठाँ । यि कारन फेन आज सामाजिक सन्जाल, सुचना परबिढिहे आट्मसाठ कैना जरुरि बा ।
कुछ परटिनिढि भावना
आजकल युवा पुस्टा सामाजिक सन्जाल फेसबुकमे मेर मेरके साहिट्य पस्कल विल्गठ । मैया प्रेमके भाव, आपन अनुभूटि, थारू भासा संस्कृटिक बाट, थारून्के पहिचानके बाट आइल बिल्गठ ।
मेलम्ची खानेपानी आयोजना, सिन्ढुपाल्चोकमे कार्यरट भौगर्भिक इन्जिनियर अनिल चौधरी थारून्के पहिचानके परटि चिन्टिट विल्गठाँ । उहाँ आपन कविटा सामाजिक सन्जालमा मार्फट् सुटल समाजहे अइसिक झक्झोर्ठां ।
आपन भासाहे छाटिमे लगुइयन,
आपन अंगनाहे डौना बेबरीसे सजुइयन,
कौन गल्लिमे नुकल बटो,
कौन कोन्टिम खुँस्टल बटो,
डिन महिना विट गइल,
आज टोहार पहिचान फेन मेट गइल ।
अस्टके प्रसादु थारू फेन थारून्के पहिचानके रच्छाके लग युवन्हे लल्कर्टि सामाजिक सन्जालमे आपन कविटामे लिख्ले बटाँ,
टुहार जग्गम खुँटा गारक, साँढ छाँट्ट का ह्यारटो टुँ ?
टुहार छाइ बहिन्यनक, नाक काट्ट का ह्यारटो टुँ ?
टोहार नसामे टाटुल खुन बा कि नाई, अइ थारू
मढेसि बनाक टुहार पहिचान ख्वासट का ह्यारटो टुँ ?
अस्टके साउदी अरेबियासे अजित चौधरी आपन फेसबुक मार्फट् आपन मनरख्निहे ढाडस डेहक लग कविटामे असिक आगे सर्ठां–
डिन राट छटपट छटपट कर्टि रठुँ मैया पाइक लाग
ढिल नि कर्ख टुहाँर हाँठ टुहाँर डाई बाबन्से मागम
जिन सोच्हो मैया आउर टुहिन कैक मै टुहार हुइटुँ
हंँस्टि डुल्टि मैया लगइटि संगे संगे नाचम ।
समसामयिकटा फेसबुक साहिट्यके लोभलग्टिक गुन हो । डोसर बर्दियाली नारी स्रष्टा सीता निश्छल अक्सर मुक्टक फेसबुकमे ढर्ठि । परेम डिवसके उपलच्छेमे उ अइसिक मुक्टक पोष्ट करले बटि ।
परेम डिवस अकेलि मनाउँ कइसिके ?
टोहार बिना डिल बुझाउँ कइसिके ?
मन रोइटा समझ–समझके टुहिन
टर फे मनके बाट बटाउँ कइसिके ?
पहिले घर छोरके बाहर जाइट टे आपन सनेस चिठि मार्फट् पठइना एक्केठो किल माढ्यम रहे हुलाक । ओहेसे खबर पुग्ना समय लागे । लेकिन आब सुचना परबिढि बहुट सहज बनाडेले बा । विडेस गइल युवालोग आपन परान प्यारिहे फेसबुक मार्फट् सम्झैटि कठाँ । जइसिक टइसिक घरबार चलाउ । मै महा डुर बटुँ । डुःख जहाँ फे करे परठ । अस्टे–अस्टे भावनासे सम्झैटि बुद्धिराम चौधरी आपन कविटा लिख्ठाँ ।
डुर डेस बटुँ जस टस घर चलैहो प्यारि
सुखसे निचलट डुख कर कर चलैहो प्यारि
घर छ्वार पर्ना गरिबनके बिवस्टा बा
डुखम फे खुसि होख गुजर चलैहो प्यारि ।
कवि, लेखकके भुमिका खासकैके परटिपच्छके रहठ । पत्रकार ओ साहिट्यकार कृष्णराज सर्वहारी अपने फेन सट्टाके भरागिँ उच्याइ नैसेक्ना कहिके सडक जिन्डावाड मुक्टक फेसबुकमे असिक अपडेट कर्ठां ।
नइ करे जानजाइठ टरक भरक
कोइ गँवार कहे का परि फरक
नइ जान्जाइठ सट्टाके चाकरि करे
यि जिउ टे हरडम रोजठ् सरक ।
आजकल ठारू भासामे सब्से ज्याडा रचना बर्दियाके सरस्टा ठाकुर अकेला आपन फेसबुकमे खासकैके गजलके बौछार पोष्ट कर्ठां । बिडेसमे रहल चितवनके कुमार अभागी साउदीसे परडेसि पिरा भरमार फेसबुकमे पोष्ट कर्टि बटाँ । अइसिक बिडेसमे रहल जंग्रार साहिट्यिक बखेरिके सरस्टा हुइट या हिरगर साहिट्यिक बगाल, जिउगर साहित्य समाज कैलालीमे आबड्ढ सरस्टा सामुहिक च्याट कैके फेन थारू साहिट्यहे परवर्ढन कर्टि बटाँ ।
सामाजिक विकृटि विसंगटिके व्यंग्य, मैया–प्रेम, अन्भुटि, कविटा, गजल, गिड, संस्मरन, कठा पहिचानके निसानि आजकल सामाजिक सन्जाल मार्फट् घनके पर्हे मिलठ । साहिट्यकार छविलाल कोपिला आपन फेसबुक मार्फट थारूनके खास खास टरटिउहारके बारेमे विस्टिरिट रुपमे जानकारि डेके थारून्के बारेम ठप जानकारि लेहक चहुइयनहे सहजिल बनैना काम कइडेले बटाँ ।
अस्टके विडेसमे बैठल युवन्हे साहिट्य सिर्जनाके लग सिखाके डग्गर बनल बटाँ सोम डेमनडौरा । उ थारू साहिट्यहे सामाजिक सन्जाल मार्फट् जोरडार रुपसे आगे बर्हुइया एक ससक्ट युवा हुइट । थारू भासक् गजल, कविटा, मुक्तक, कठा जंग्रार साहिट्यिक बखेरि मार्फट् स्काइभसे विस्वके कोन्वाँ कोन्वाँमे रलक साहित्यकारके सबसे पहिले जुटौलाके संयोजन कैके बहुट रचनाट्मक भुमिका खेल्ले बटाँ । स्वडेस होए या विडेस फेसबुक मार्फट् जट्ना फेन साहिट्य आइटा यकर सुट्राढार सोम डेमनडौरा हुइट कलेसे फरक नै परि । थारू साहित्यहे सुचना परबिढि मार्फट् आगे बर्हैना काममे सबसे भारि योगडान सोम डेमनडौरा करले बटाँ । जंग्रार साहित्यिक बखेरिक साखा विडेसमे मलेसिया, दुवई, साउदी अरेबिया, भारतमे खुलल समाचार मिलल बा । जंग्रार साहिट्यिक बखेरिक साखा मलेसिया ओ मुम्बई, भारतके अगुवाइमे क्रमसः पस्नक पन्हवा, जेउनास थारू गजल संग्रह परकासन हो सेकल बा ।
अस्टके जंग्रार साहिट्यिक बखेरिक अगुवाइमे हाल १३ एफएम रेडियो स्टेसनसे थारू साहिट्यिक रेडियो कार्यक्रम ल्वाहल मन परसारन हुइठ । यकर संचालक सेबेन्द्र कुसुम्हियाँ संयोजन कैटि आइटटाँ । यि निटान्ट थारू साहिट्यिक रेडियो कार्यक्रम हो । यकर लावा–लावा संस्करण संचालक कुसुम्हियाँ हरेक भाग पाठक समच्छ आपन ब्लग जटटउस्ररतजबचगकबजष्तथबmबल।दयिनकउयत।अयm मार्फट पोष्ट कैके डेस विडेसके स्रोटनहे सुने सेक्ना ओ डाउनलोड करेसेक्ना सेवा डेटि आइल बटाँ । वहाँ साहिट्यम रुचि ढरुइया सोरोटन्हे कार्यकरमके डिजिटल कपि इमेल कैके फेन सेवा डेटि आइटटाँ । यिहिसे फेन थारू भासा साहिट्यहे आढुनिक परबिढि मार्फट् आघे बर्हैना काममे ढेर टेवा पुगैले बा ।
औरौनिमे
अइसिक हेर्लेसे साहित्यपरटि रुचि रहुइयनके लग फेसबुक एकठो ससक्ट माढ्यम बनल बा । थारू भासक किटाब, पट्रापट्रिका छपाके हरेक पाठक समच्छ पुगैना सम्भव नै हो । लेकिन अनलाइन, इन्टरनेट, सामाजिक संजाल मार्फट् आज उ काम सम्भव बनल बा । आज विस्वभरके रुचि रखुइया पाठकके सामुन्ने हम्रे हमार रचना पस्के सेक्ना अवस्ठा बनल बा ।
एक टे थारू भासक किटाबके बजार कम बा । यडि कोइ आपन किर्टि ५ सय परटि छापल टे उ बजारमे विकैना कर्रा परठ । मान लि ५ सय विकगैल टे उ किटाब जम्मा ५ सय पाठक पर्हे पइलाँ । लेकिन उहे सिर्जना थारू कम्युनिटि जइसिन फेसबुक मार्फट सक्कुओर बाँटके छोट समयमे यकर कैयौ गुना ढेर पाठक लोग पर्हे पइहि । थारू साहित्यबारे जन्ना बुझ्ना मौका पइहि । सामाजिक सन्जाल कलक विचार, आपन भावना, सार्वजनिक कैना ठाउँ हो । यडि एकचो बँट्लेसे छिनभरमे फैलजाइठ । लाखौ पाठक सुने पर्हे पइठाँ । इहिसे थारू साहित्यके व्यापकटा बह्रना निस्चिट बा । यम्ने निखार आइ । हमार भासा संस्कृति आउर फराक हुइ, बल्गर हुइ । सुचना परबिढिके परयोगले हम्रहिन बरवार अवसर डेले बा । यकर भरपुर सडुपयोग करे सेक्लेसे भासा साहित्य सम्रिड्ढि कर्नामे बहुट योगडान डि । ओहेसे समयके बहावसंगे हम्रे सबजाने सजगटाके साठ सडुपयोग करे सेकि । (सारलः लावा डग्गर)
प्रकाशित मितिः १३ जेष्ठ २०८३, बुधबार १६:४७
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